Tuesday, July 24, 2012

~सुकुन के तलाश मे ~


ऐसी बोहोत कम जगह होती है जहा आप अपने आप से बाते कर सके , अपने आप को जान सके .
मै जनता हु ऐसी एक जगह  को जहा  मै अक्सर जाया करता हु .वो है रायगड मे  बसा  एक छोटा सा गाँव "दिवेआगार ". ये गाँव पुणे से करीब 180 Km और मुंबई से 210 Km दुर हे . 
शहर से दूर होने के कारन यहाँ का वो सुकून आज भी जिंदा है . यहाँ है वो बात  वो लोग जो मै अक्सर तलाशा करता हु .पिछले 3 सालो से हर साल जून के महीने मे हम कुछ दोस्त निकल पड़ते है पुणे से दिव्याआगार के सफ़र पे .बारिश इस टाइम तक अपना असर दिखा चुकी होती है . हर तरफ हरियाली , धुंध  और वो गीले रास्ते.


 सफ़र की  शुरुआत होती है दोस्तों के अनगिनत बहानो से "भाई इस बार नहीं आ  पाउँगा ", "जाएँगे  कैसे ? गाड़ी कहा है ? ","अबे अछे से बारिश तो होने दे ..फिर जाएँगे ".....इन सब बहानो से लड़ते-लड़ते आखिर क़ार सब मान ही  जाते है ... क्योकि बात दिवेआगार की जो है !सफ़र की सुरुआत होती है कोथरुड से जहा ज़्यादातर कमीने ...मेरा मतलब है मेरे ज़्यादातर दोस्त रेहेते  है. 
दिवेआगार पहुचने  से पेहेले  2 पडाव  आते है  "मुल्शी  डैम " और "ताम्हिनी  घाट". 



 

हर तरफ घूमते  रास्ते ,धुंध और पानी के झरने . यहाँ आपको काफी लोग मिल जाएँगे क्युकी पुणे से ये ज्यादा दुर  नहीं है (करीब 70 Km ).




कुछ पेटपूजा होने के बाद सफ़र चालू होता है "दिव्याआगार" के लिए , जो अभी भी करीब 150 Km है .
ये सफ़र कुछ ऐसा होता है की मन करता है बस कभी ख़तम न हो.
आखिरकार हम पोहोच जाते है अपनी मंज़िल पे .



कुछ समय के लिए मानो वक़्त थम  सा जाता है .

रात होते ही बस निकल पढो वापस अपने शेहेर , वो ही भीड़ भाढ वो ही रोज़ की भाग दौढ़ बस दिल मे एक खयाल ले के  ..की ...." अगले साल फिर आएँगे "......



3 comments:

  1. sahi hai bhai.......... Nxt time saab jayegaaaaa

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  2. Photos and expression ekdam sahii hai ..

    I like very much .. an would like to be part of upcoming trip :-)

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